जेपीएससी (JPSC) क्या है? (JPSC Kya Hai) | JPSC Syllabus In Hindi

जेपीएससी (JPSC) क्या है (JPSC Kya Hai) :-

आज के इस लेख में हम झारखंड राज्य के सबसे लोकप्रिय एवं कठिन परीक्षा JPSC के बारे में बताने जा रहे है। इस लेख में जेपीएससी क्या है (JPSC Kya Hai) एवं, झारखंड सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ी सारे सवालों का जवाब दिया गया है, तो कृप्या इसे अंत तक पढ़े यह आपके लिए अत्यंत उपयोगी है।

झारखंड राज्य पूरे देश में सबसे ज्यादा वनों वाला प्रदेश है, इसी कारण से इसका नाम झारखंड रखा गया है।

झारखड़ शब्द में, झार का मतलब वन एवं खंड का मतलब टुकड़ा यानी भारत का ऐसा भूखंड जो वनों से घिरा हुआ है।

यह राज्य मूल रूप से अपने नाम के अनुसार वन क्षेत्र है।

झारखंड राज्य में प्रचुर मात्रा में खनिज के भंडार हैं।

झारखंड राज्य वर्ष 2000 में 15 नवंबर (आदिवासी नायक बिरसा मुंडा के जन्म दिवस) के दिन बिहार राज्य से अलग हुआ एवं उस दिन झारखंड एक अलग राज्य के रूप में गठित हुआ।

वर्तमान में, झारखंड की राज्य की राजधानी रांची है।

भारत के उत्तर में स्थित इस राज्य का आकार चतुर्भुज जैसा है, जिसकी चौड़ाई (पूर्व से पश्चिम) 463 किलोमीटर एवं (लंबाई उत्तर से दक्षिण) 380 किलोमीटर है। 

झारखंड राज्य का कुल क्षेत्रफल 79,714 वर्ग किलोमीटर है, जो सम्पूर्ण भारत के भूभाग का 2.42% है।

यह राज्य उत्तर में बिहार, दक्षिण में ओडिशा, पूर्व में पश्चिम बंगाल एवं पश्चिम में छत्तीसगढ़ एवं उत्तर प्रदेश से घिरा हुआ है।

2011 के जनगणना के अनुसार, झारखंड राज्य की आबादी लगभग 3,29,88,134 है, एवं यहां का लिंग अनुपात 949 स्त्रियों में 1000 पुरुष है। ,

झारखण्ड राज्य खनिज संपदाओं से परिपूर्ण राज्य है, यहां मुख्य रूप से खनिजों में कोयला, हैमटाइट ( लोहे का अयस्क), मैग्नेटाइट ( लोहे का अयस्क), तांबा का अयस्क, चुना पत्थर, बक्साइट, साइनाइट, ग्रेफाइट, सिलिका, अग्नि मिट्टी, अभ्रक इत्यादि पाए जाते है।

इस राज्य में 5 प्रमंडल, 24 जिले, 43 अनुमंडल एवं 260 प्रखंड है।

इस राज्य के प्रमुख पर्यटक स्थल देवघर वेधनाथ मंदिर, हुंडरू जलप्रपात, दलमा अभ्यारण, बेतला राष्ट्रीय उद्यान, श्री समेद शिखरजी जैन तीर्थस्थल ( पारसनाथ), पतरातु डैम, गौतम धारा, जोन्हा, छिन्नमस्तिका मंदिर, रजरप्पा, पंचघाघ जलप्रपात, हजारीबाग राष्ट्रीय अभ्यारण इत्यादि है।

जेपीएससी (JPSC) क्या है? (JPSC Kya Hai)

Table of Contents

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC), झारखंड की एक आधिकारिक संस्था है। 

JPSC, झारखंड राज्य में सभी प्रकार के सिविल सेवा परीक्षा एवं विभिन्न प्रशासनिक पदों पर भर्ती परीक्षा का आयोजन करवाती है।

झारखंड लोक सेवा आयोग की स्थापना, भारत सरकार के 1935 अधिनियम के अंतर्गत की गई थी।

झारखंड राज्य की स्थापना 15 नवंबर 2000 में होने के बाद से, सन् 2001 से यह संस्था प्रभावी रूप से झारखंड राज्य को अपनी सेवाए दे रही है।

संघ या राज्यों में लोक सेवा आयोग के गठन के बारे में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315 से लेकर 323 तक में वर्णित है।

झारखंड लोक सेवा आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जो झारखंड राज्य के अंदर सिविल सेवा एवं प्रशासनिक सेवा पदों के लिए अधिकारों के चयन का काम करती है।

उम्मीद करते है की आपको जेपीएससी क्या है? (JPSC Kya Hai) के बारे में बेसिक जानकारी आपको मिल होगी। ब्लॉग पोस्ट को आगे पढ़ते रहे, जेपीएससी से जुड़ी हर सवाल का इस पोस्ट में दिया गया है।

जेपीएससी के आधिकारिक वेबसाइट पर जाने के लिए यहाँ क्लिक करें

पीएससी (JPSC) क्या है?

जेपीएससी (JPSC) के माध्यम से निम्न विभागों में चयन होता है-

  • झारखंड प्रशासनिक सेवा ( Jharkhand Administrative Service)
  • झारखंड पुलिस सेवा ( Jharkhand Police Service)
  • झारखंड कारा सेवा ( Jharkhand Kara Service)
  • झारखंड राज्य नियोजन सेवा (Jharkhand state planning service)
  • झारखंड शिक्षा सेवा ( Jharkhand educational service)
  • झारखंड सहकारिता सेवा ( Jharkhand cooperative service)
  • झारखंड वित्त सेवा ( Jharkhand financial service)
  • झारखंड सामाजिक सुरक्षा सेवा ( Jharkhand social security service)
  • झारखंड सूचना सेवा ( Jharkhand information service)
  • झारखंड योजना सेवा ( Jharkhand planning service)

जेपीएससी (JPSC) एग्जाम के लिए योग्यता

जेपीएससी, झारखंड राज्य में विभिन्न प्रकार के परीक्षाओं का आयोजन करती है, सभी परीक्षाओं के लिए अलग एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की आवश्यकता होती हैं। 

मुख्यत: जेपीएससी राज्य में इंजीनियरिंग सर्विस एवं झारखंड सिविल सेवा सर्विस की परीक्षाओं का आयोजन करती हैं।

इंजीनियरिंग सर्विस एग्जाम ( जेपीएससी के द्वारा आयोजित)

जेपीएससी के द्वारा आयोजित इंजीनियरिंग सर्विस एग्जाम में शामिल होने के लिए अभ्यार्थियों को किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से इंजीनियरिंग डिग्री प्राप्त करना आवश्यक है। यह परीक्षा तीन चरणों में ली जाती हैं सबसे पहले प्रारंभिक परीक्षा जो लिखित माध्यम से लिया जाता है, प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल किया जाता है। जो पुनः लिखित माध्यम में लिया जाता है। मुख्य परीक्षा में पास करने के बाद साक्षात्कार के माध्यम से चयन की प्रकिया को पूरा किया जाता है। इसके अंतर्गत राज्य के अभियांत्रिकी विभाग में विभिन्न पदों पर नियक्ति की जाती है।

झारखंड सिविल सेवा परीक्षा ( जेपीएससी )

जेपीएससी झारखंड राज्य के अंदर काम करने वाले विभिन्न प्रकार के प्रशानिक सेवाओ जैसे राज्य पुलिस सेवा, राज्य कारा सेवा, राज्य नियोजन सेवा आदि के अंतर्गत अनेक पदों पर नियुक्ति हेतु JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन करवाता है। यह एक लंबी चयन प्रक्रिया वाली परीक्षा है, जिसमें प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Exam) , मुख्य परीक्षा (Mains Exam) तथा साक्षात्कार ( Interview) सहित कुल तीन चरण होते हैं। पुलिस सेवाओं में भर्ती लिए जेपीएससी एवं संबंधित विभाग द्वारा निर्धारित शारीरिक योग्यता का भी परीक्षण किया जाता है। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी को कम से कम किसी स्ट्रीम स्नातक पास होना अनिवार्य है।

जेपीएससी (JPSC) एग्जाम पैटर्न

झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा तीन चरणों में होती है :-

  • प्रारंभिक परीक्षा
  • मुख्य परीक्षा
  • साक्षात्कार

सबसे पहले उम्मीदवारों को प्रारंभिक परीक्षा पास करनी होगी उसके बाद ही वो आगे के चयन प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद ही उम्मीदवार मुख्य परीक्षा दे सकेंगे मुख्य परीक्षा तीन से चार विषयों कि होती है, जो विषय आप अपनी इच्छानुसार प्रारंभिक शिक्षा पास करने के बाद चुन सकते है।

प्रारंभिक परीक्षा

जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा कुल 200 अंको की होती है, जिसमे 100 प्रश्न होते है एवं प्रत्येक प्रश्न के लिए 2 अंक दिए जाता है। इस परीक्षा में MCQ प्रश्न पूछे जाते है, जिसमें आपको एक प्रश्न और उसके चार उत्तर दिए होंगे, आपको सही उत्तर को चयनित करके उत्तर पुस्तिका को भरना होगा। इस परीक्षा में दो घंटे का समय दिया जाता है। इस परीक्षा को पास करने के बाद ही आप मुख्य परीक्षा में शामिल हो पाएंगे।

मुख्य परीक्षा

मुख्य परीक्षा में केवल वही उम्मीदवार शामिल हो सकते है जो उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल किए हो। यह परीक्षा झारखंड सिविल सेवा चयन प्रक्रिया का दूसरा चरण है। मुख्य परीक्षा में आपको तीन से चार विषयों की परीक्षा देनी होती है, यह परीक्षा लिखित माध्यम से होती है। झारखंड सिविल सेवा परीक्षा का यह चरण बहुत ही मुश्किल एवं बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस चरण में आपको बहुत ही मुश्किल प्रकार के प्रश्न पूछे जाते है, जिसके उत्तर करीब आपको 150 से 500 शब्दों में लिखने होंगे, जो पूर्ण रूप से प्रश्न पर आधारित है। आप प्रश्नों के उत्तर जितने अच्छे एवं सही तरीके से लिखेंगे, मुख्य परीक्षा में आपके सफल होने चांस उतने ही अधिक होने।

साक्षात्कार

झारखंड सिविल सेवा परीक्षा के पहले और दूसरे चरण को पास करने के बाद ही आपको साक्षात्कार देने का मौका मिलेगा। झारखंड सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम चरण है। साक्षात्कार में सफल होने के बाद ही आप झारखंड लोक सेवा आयोग में अधिकारी के रूप में नियुक्त हो सकेंगे। साक्षात्कार के माध्यम से उम्मीदवार के कम्युनिकेशन स्किल, मैनेजमेंट स्किल आदि की जांच की जाती है।

जेपीएससी (JPSC) सिलेबस

जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा का पाठ्यक्रम

झारखंड सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में दो पेपर शामिल है। सामान्य ज्ञान और झारखंड विशिष्ट सामान्य ज्ञान।

सामान्य ज्ञान (Paper -1) के निम्नलिखित विषय है :-

  • भारत का इतिहास :- प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत और आधुनिक भारत
  • भारत का भूगोल :- सामान्य भूगोल, भौतिक भूगोल, आर्थिक भूगोल, और सामाजिक एवं जनसांख्यिकीय भूगोल
  • आर्थिक एवं सतत विकास :- बुनियादी विशेषताएं एवं सतत विकास और आर्थिक मुद्दे।
  • भारतीय राजनीति और शासन :- भारत का संविधान, लोक प्रशासन और सुशासन, विकेंद्रीकरण, पंचायत और नगरपालिका
  • सामान्य विज्ञान :- प्रौद्योगिकी और आईटी, कृषि
  • राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्वपूर्ण घटनाएं
  • झारखंड विशिष्ट प्रश्न (इतिहास, समाज, संस्कृति और विरासत के बारे में समाज में जागरूकता)
  • सामान्य प्रकृति के विविध प्रश्न।

झारखंड सामान्य ज्ञान (Paper -2) के निम्नलिखित विषय है –

  • झारखंड का इतिहास
  • झारखंड में हुए प्रमुख आंदोलन
  • झारखंड की विशिष्ट पहचान
  • झारखंड : साहित्य और साहित्य से जुड़े व्यक्तित्व
  • झारखंड : लोग और साहित्य; नृत्य; संगीत; पर्यटन स्थल; आदिवासी संस्कृति
  • झारखंड : प्रमुख शिक्षण संस्थान
  • झारखंड के प्रमुख खेल
  • झारखंड के भूमि संबंधी कानून एवं अधिनियम
  • झारखंड के प्रमुख उद्योग और संसाधन
  • झारखंड का आपदा प्रबंधन
  • झारखंड विविध

जेपीएससी मुख्य परीक्षा का पाठ्यक्रम

Paper – 1 : सामान्य हिंदी और अंग्रेजी ( क्वालीफाइंग)

  • पेपर 1 के दो भाग हैं :
    • हिंदी
    • अंग्रेजी
  • दोनों भागों का वेटेज समान है, प्रत्येक भाग के लिए 50 अंक। इस पेपर का उद्देश्य उपरोक्त दो भाषाओं में उम्मीदवार की कार्यकुशलता का परीक्षण करना है। दोनों भागों में मैट्रिक स्तर के मानकों के अनुरूप प्रश्न पूछे जाएंगे।
  • झारखंड सिविल सेवा परीक्षा पैटर्न के अनुसार, इन इन भागों में निम्नलिखित विषयों से प्रश्न पूछे जाएंगे।
    • निबंध ( Essay)
    • व्याकरण ( Grammar)
    • कंप्रीहेंशन ( Comprehension)
    • संक्षिप्त लेखन ( Precis Writing)

Paper – 2 : भाषा और साहित्य

इस भाग में उम्मीदवारों के निम्नलिखित भाषा और साहित्य में से किसी एक को चुनना होगा।

  • उड़िया भाषा और साहित्य
  • बंगाली भाषा और साहित्य
  • उर्दू भाषा और साहित्य
  • संस्कृत भाषा और साहित्य
  • अंग्रेजी भाषा और साहित्य
  • हिंदी भाषा और साहित्य
  • संथाली भाषा और साहित्य
  • पंचपरगनिया भाषा और साहित्य
  • नागपुरी भाषा और साहित्य
  • मुंडारी भाषा और साहित्य
  • कुरुक्स भाषा और साहित्य
  • कुरमाली भाषा और साहित्य
  • खोरठा भाषा और साहित्य
  • खड़िया भाषा और साहित्य
  • हो भाषा और साहित्य

Paper – 3 : सामाजिक विज्ञान, इतिहास और भूगोल

  • इतिहास : इसमें निम्नलिखित विषयों के पाठ्यक्रम शामिल है –
    • प्राचीन काल
    • मध्यकाल
    • आधुनिक काल
    • झारखंड का इतिहास
  • भूगोल : इसमें निम्नलिखित विषयों के पाठ्यक्रम शामिल है –
    • भौतिक भूगोल (सामान्य सिद्धांत)
    • भारत का भूगोल और मानव भूगोल
    • भारत के प्राकृतिक संस्थान: विकास और उपयोग
    • झारखंड का भूगोल और उसके संसाधनों का उपयोग
    • जनसंख्या
    • औद्योगिक और शहरी विकास
    • साड़ी बंदोबस्त का प्रारूप और प्रदूषण समस्या

Paper – 4 : (भारतीय संविधान, राजनीति, लोक प्रशासन और सुशासन)

  • भारतीय संविधान और राजनीति: इसमें निम्नलिखित विषयों के अध्ययन को शामिल किया गया है –
    • प्रस्तावना, भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएं, मौलिक अधिकार और कर्तव्य, राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत
    • केंद्र सरकार (कार्यकारी और विधायिका)
    • न्याय तंत्र
    • राज्य सरकार (कार्यकारी, विधायिका, न्यायपालिका, पंचायत और नगर पालिका)
    • केंद्र-राज्य संबंध
    • अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातिय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित विशेष प्रावधान
    • संविधान के आपातकालीन प्रावधान
    • भारत चुनाव आयोग
    • राजनीतिक दल और दबाव समूह
  • लोक प्रशासन और सुशासन: इसमें निम्नलिखित विषयों के अध्ययन को शामिल किया गया है –
    • लोक प्रशासन – अर्थ, कार्यक्षेत्र और महत्व
    • सार्वजनिक और निजी प्रशासन
    • केंद्रीय प्रशासन – केंद्रीय सचिवालय, कैबिनेट सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, योजना आयोग, वित्त आयोग
    • राज्य प्रशासन – राज्य सचिवालय, मुख्य सचिवालय, मुख्यमंत्री कार्यालय
    • जिला प्रशासन – जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टर के कार्यालय की उत्पत्ति और विकास, जिला कलेक्टर की बदलती भूमिका, जिला प्रशासन पर न्यायपालिका के अलग होने का प्रभाव
    • क्रमिक प्रशासन – सिविल सेवाओं की भर्ती, संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग, सिविल सेवकों का प्रशिक्षण, नेतृत्व और उसके गुण, कर्मचारियों का मनोबल और उत्पादकता
    • प्राधिकरण का प्रत्यायोजन, केंद्रीकरण और विकेंद्रीकरण
    • नौकरशाही – इसके गुण और अवगुण, नीति निर्माण और इसके कार्यान्वयन में नौकरशाही की भूमिका; नौकरशाही और राजनीतिक कार्यपालिका के बीच गठजोड़; सामान्यवादी बनाम विशेषज्ञ 
    • विकास प्रशासन
    • आपदा प्रबंधन – कारण, शमन, आपदाओं का वर्गीकरण, तत्काल और दीर्घकालिक उपाय
    • सुशासन – लोकपाल, लोकायुक्त, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त, शिकायत निवारण, सेवा का अधिकार अधिनियम, सूचना का अधिकार अधिनियम, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, महिलाओं के खिलाफ घरेलू (हिंसा) रोकथाम अधिनियम
    • मानवाधिकार – अवधारणा, अर्थ, मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, आतंकवाद, सामाजिक मुद्दे

Paper – 5 : भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्वीकरण और सतत विकास

  • भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी विशेषताएं
    • राष्ट्रीय आय – राष्ट्रीय आय के प्राथमिक अवधारणाएं, और इसकी गणना के तरीके, उदाहरण – जीडीपी, जीएनपी, एनडीपी, एनएनपी, जीएसडीपी, एनएसडीपी, डीडीपी स्थिर और वर्तमान कीमतों पर, कारक लागत पर आदि।
    • मुद्रास्फीति – अवधारणा, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण, मौद्रिक, राजकोषीय और प्रत्यक्ष उपाय
    • जनसांख्यिकीय विशेषताएं
    • कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था – हरित क्रांति, श्वेत क्रांति, इंद्रधनुष क्रांति, विश्व व्यापार संगठन
    • औद्योगिक अर्थव्यवस्था – नीतिगत पहल और परिवर्तन
    • सार्वजनिक वित्त – सार्वजनिक वित्त का दायरा, सार्वजनिक वित्त के सिद्धांत, कराधन
    • सरकारी व्यय
    • बजट
    • राजकोषीय नीति – केंद्र और राज्य के वित्तीय संबंध, वित्त आयोग की भूमिका
    • भारत में भारतीय मौद्रिक और बैंकिंग प्रणाली की संरचना
    • भारतीय व्यापार, भुगतान संतुलन
  • सतत विकास, आर्थिक मुद्दे और भारतीय विकास रणनीति:
    • आर्थिक विकास का अर्थ और माप; अविकसितता की विशेषताएं, विकास की संकेतक: एचडीआई, जीडीआई, भारत की एचडीआई प्रगति
    • अर्थव्यवस्था के विकास में विदेशी पूंजी और प्रौद्योगिकी की भूमिका
    • सतत विकास – सतत विकास की अवधारणा और संकेतक, आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्थिरता, जीडीपी की अवधारणा
    • विकास की स्थिति और सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिए के वर्गों से संबंधित मुद्दे, जैसे एसटी, एससी, धार्मिक अल्पसंख्यक, केंद्रीय/राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाएं
    • गरीबी और बेरोजगारी: माप और रुझान, बीपीएल परिवारों की पहचान, बहुआयामी गरीबी सूचकांक
    • खाद्य और पोषण सुरक्षा – भारत में खाद्य उत्पादन और खपत में रुझान, खाद्य सुरक्षा की समस्या, भंडारण, खरीद, वितरण, आयात और निर्यात की समस्याएं और मुद्दे। सरकारी नीतियां योजनाएं और कार्यक्रम जैसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली, मध्यान्ह भोजन योजनाएं, खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए सरकारी नीतियां
    • आर्थिक सुधार, प्रकृति और भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
  • नये आर्थिक सुधार – उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण, आईएमएफ, विश्व बैंक जैसे अंतर्राष्ट्रीय वित्त संस्थानों की अच्छी समझ; विश्व व्यापार संगठन।
    • वित्तीय और बैंकिंग क्षेत्र में सुधार, आर्थिक सुधार, नाबार्ड, आईआरबी
    • भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्वीकरण – विभिन्न क्षेत्रों पर इसके सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव, भारत में एफडीआई और एफआईआई के मुद्दे
    • कृषि क्षेत्र – विकास, सब्सिडी के मुद्दे और कृषि में सार्वजनिक निवेश
    • भारत में औद्योगिक विकास और आर्थिक सुधार – औद्योगिक नीति में बड़े बदलाव, औद्योगिक विकास पर इसका प्रभाव, सुधार के बाद की अवधि में भारत के औद्योगिकरण में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमी की भूमिका, सार्वजनिक उद्यमों का विनिवेश और निजीकरण
  • झारखंड की अर्थव्यवस्था – विशेषताएं, मुद्दे, चुनौतियां, रणनीतियां
    • झारखंड की अर्थव्यवस्था का आर्थिक विकास और संरचना, क्षेत्रीय संरचना, एसडीपी में वृद्धि और पिछले दशक में प्रति व्यक्ति एनएसडीपी, झारखंड राज्य में कृषि और औद्योगिक विकास
    • झारखंड की जनसांख्यिकीय विशेषताएं – जनसंख्या वृद्धि, लिंग अनुपात, घनत्व, साक्षरता, कार्यबल की संरचना, ग्रामीण-शहरी संरचना आदि
    • झारखंड में गरीबी, बेरोजगारी, खाद्य सुरक्षा, कुपोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य संकेतको की स्थिति, प्रमुख पहल, कृषि और ग्रामीण विकास के मुद्दे, प्रमुख्य कार्यक्रम और योजनाएं, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम, खाद्य सुरक्षा योजनाएं।
    • झारखंड में भूमि, जंगल और पर्यावरण के मुद्दे

Paper – 6 : सामान्य विज्ञान, पर्यावरण और प्रौद्योगिकी विकास

  • भौतिक विज्ञान:
    • एमकेएस, सीजीएस, एसआई जैसी इकाई की प्रणाली पर बुनियादी ज्ञान
    • गति, वेग, गुरुत्वाकर्षण, द्रव्यमान, भार, प्रभाव, कार्य, शक्ति और ऊर्जा पर विषय
    • सौर मंडल से संबंधित विषय
    • ध्वनि तरंग दैध्य आवृत्ति, इंफ्रासोनिक और अल्ट्रासोनिक ध्वनि विशेषताएं और अनुप्रयोगों से संबंधित अवधारणाएं
  • जीव विज्ञान:
    • जीवित दुनिया, कोशिका संरचना, इसके कार्यों, जीवो की विविधता, बायोमोलीक्यूलस सेल प्रजनन पर अवधारणाएं
    • मेडलियन इन्हेरिटेंस मानव विकास सहित पृथ्वी पर जीवन के विकास के सिद्धांत
  • कृषि विज्ञान: 
    • झारखंड के कृषि जलवायु परिस्थितियों, वर्षा पैटर्न और प्रत्येक क्षेत्र में अजैविक तनावो की समझ।
    • झारखंड के खाद्य और बागवानी फसलों का ज्ञान, फसलों के विविधीकरण की पीछे की आवश्यकता को समझना, जलवायु परिवर्तन की शुरुआत के कारण पोषण सुरक्षा, कृषि उत्पादन में सुधार में वर्षा जल संचयन की भूमिका और मछली पालन
    • उम्मीदवारों को मिट्टी की उर्वरता, मिट्टी के स्वास्थ्य और सुधार के लिए किए गए उपायों, जैविक खेती, कृषि वानिकी, बंजर भूमि और राज्य के किसानों की मदद करने के लिए सरकारी योजनाओं के बारे में अच्छी जानकारी होना आवश्यक है
  • पर्यावरण विज्ञान:
    • वैश्विक पर्यावरण मुद्दों, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण से निपटने हेतु पर्यावरण उपायों के संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा किए गए उपाय
    • कई पर्यावरण कानूनों की समझ
    • जैवविविधता हॉटस्पॉट और जैवविविधता हॉटस्पॉट के खतरों पर उम्मीदवारों का ज्ञान
  • विज्ञान और तकनीक:
    • परमाणु प्रौद्योगिकी से संबंधित भारत सरकार की नीतियां, वैश्विक परमाणु नीतियों पर ध्यान केंद्रित करती हैं
    • ऊर्जा के विभिन्न नवीकरणीय और गैर नवीकरणीय स्रोतों के माध्यम से देश की ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा बनाई गई योजनाएं
    • साइबर अपराधों के कारण सामने आने वाली सूचना प्रौद्योगिकी चुनौतियों में नवीनतम विकास का ज्ञान

जेपीएससी की तैयारी कैसे करे?(JPSC Ki Taiyari Kaise Kare)

जेपीएससी की तैयारी कैसे करे? (JPSC Ki Taiyari Kaise Kare) यह सवाल हर उस विधार्थी में मन आता है, जो इस एग्जाम के लिए आवेदन करता है, नीचे मैने कुछ महत्वपूर्ण बिंदु बताए है, अगर उन बिंदुओ को ध्यान में रखकर अपनी तैयारी करते है तो अवश्य ही सफल होंगे।

जेपीएससी की यह परीक्षा हमे सीधाअधिकारीका पद प्रदान करती है। अधिकारी बनने के लिए हमें बहुत मेहनत करनी होगी जिसके कारण यह परीक्षा बहुत मुश्किल होती हैं क्योंकि यह परीक्षा राज्य भर में सबसे बड़ी स्तर की परीक्षा होती है तो कठिन तो होगी परंतु अगर हम मेहनत करें तो कोई भी परीक्षा कठिन नहीं होगी।

इसीलिए ऊपर बताए इसके सिलेबस के अनुसार सही जानकारी और सही नियमों से अगर पढ़ाई किया जाए और मेहनत करें, तो अब जरूर से जरूर झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा को पास कर सकते हैं, और झारखंड के एक पदाधिकारी के रूप में नियुक्त किए जा सकते हैं। 

बस आपको मेहनत करनी होगी मेहनत से ही सफलता हासिल होती है। दोस्तों परीक्षा कोई कठिन नहीं होती है, अगर आप पढ़ेंगे तो सारी चीजें सरल होती चली जायेंगी और आपको जानकारी भी होगी। इसीलिए मेहनत करें और अच्छे से पढ़ाई करें।

आशा करता हूं कि जेपीएससी की तैयारी कैसे करे?(JPSC Ki Taiyari Kaise Kare) सवाल का जवाब आपको मिल चुका होगा।

जेपीएससी में कितनी सैलरी होती हैं?

जेपीएससी एक परीक्षा करवाने वाली राज्य स्तर के संस्थान हैं। इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने में बाद इसमें बहुत सारे अलग-अलग स्तर की स्थान तथा पद मिलते हैं, तो इसकी जो सैलरी है वो भी अलग-अलग होगी।  लेकिन हम कह सकते हैं कि अगर आप जेपीएससी की परीक्षा पास करने के बाद किसी भी पद में रहे तो आपकी सैलरी लगभग 40,000 से 65000 तक होगी।

इसमें थोड़ी सी भिन्नता भी आ सकती है कि आपका कार्य करने का स्थान कहा पर है। अगर शहरी (अर्बन) में कार्य करते हो तो सरकार आपको जो पैसा देगी तो वह थोड़ा ज्यादा देगी। क्योंकि शहरों में खर्च भी थोड़ा ज्यादा होती है, एवं सारी चीजें महंगी होती है। 

परंतु अगर आपके कार्य करने का स्थान ग्रामीण (रूरल) एरिया में होगा तो आपको खर्च करने के लिए कम सरकारी वेतन मिलेगा और आपको रहने, खाने के लिए कम भत्ता दिया जाएगा, इसी के अनुसार आपकी आय थोड़ी कम और थोड़ी अधिक हो सकती है, परंतु लगभग 40000 से 65000 तक के मध्य में ही होगी।

जैसे-जैसे आप अपने कार्य में प्रगति करेंगे वैसे-वैसे आपकी स्थान में प्रगति होगी और आप उच्च स्तर के पद में जाएंगे तो उसी प्रकार से आपकी आय में वृद्धि होगी। यह पूर्ण रूप से आपके कार्य के ऊपर निर्भर करता है कि आप कितना अच्छा काम कर रहे है।

आशा करता हूं की इस लेख के माध्यम से आपको ( जेपीएससी (JPSC) क्या है इसको के बारे में संपूर्ण जानकारी मिल गई है। इस लेख में बताए गए महत्वपूर्ण बिंदु निम्न हैं –

  • About Jharkhand
  • जेपीएससी (JPSC) क्या है
  • JPSC के माध्यम से किस किस विभाग में चयन होता है
  • JPSC एग्जाम के लिए योग्यता
  • इंजीनियरिंग सर्विस एग्जाम ( by JPSC)
  • झारखंड सिविल सेवा परीक्षा
  • JPSC एग्जाम पैटर्न
    • प्रारंभिक परीक्षा पैटर्न
    • मुख्य परीक्षा पैटर्न
    • साक्षात्कार पैटर्न
  • JPSC सिलेबस
    • प्रारंभिक परीक्षा सिलेबस
    • मुख्य परीक्षा सिलेबस
  • JPSC की तैयारी कैसे करे
  • JPSC में कितनी सैलरी होती हैं
Syllabus of JPSC

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